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शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाना दुष्कर्म का अपराध माना जाएगा: हाई कोर्ट

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प्रयागराज (राजेश सिंह)। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि शुरू में शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाना दुष्कर्म का अपराध माना जाएगा। इस टिप्पणी के साथ आपराधिक केस कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी।

यह आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना ने राहुल सिंह की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा कि प्रथमदृष्टया पीड़िता की सहमति धोखे और गलत जानकारी के आधार पर प्राप्त की गई प्रतीत होती है इसलिए मामले की सच्चाई का परीक्षण ट्रायल कोर्ट में ही होगा।

फतेहपुर के किशनपुर थाने में 19 अगस्त, 2024 को दर्ज एफआईआर के अनुसार पीड़िता अपने तीन बच्चों के पालन-पोषण के लिए चाय की दुकान चलाती थी। लगभग दो वर्ष पहले उसकी मुलाकात आरोपित से हुई, जो उसकी दुकान पर आता-जाता था। पीड़िता का आरोप है कि आरोपित ने खुद को अविवाहित बताकर उससे शादी करने का वादा किया और उसी भरोसे पर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसी दौरान वह गर्भवती हो गई।

पीड़िता का यह भी कहना है कि 17 जून, 2024 को आरोपित अन्य लोगों के साथ उसके घर आया और पहले से शादीशुदा होने की जानकारी दी। बताया कि उसके दो बच्चे हैं। उसका आरोप है कि इसके बाद उसे जबरन गर्भपात की दवा खिलाई गई, जिससे उसका गर्भपात हो गया और उसे मारपीट कर धमकी भी दी गई।

जांच के बाद पुलिस ने आरोपित के खिलाफ आईपीसी की धारा 376, 313, 323 और 506 के तहत चार्जशीट दाखिल की। अन्य नामजद आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर उन्हें आरोपमुक्त कर दिया गया। आरोपित की ओर से कहा गया कि पीड़िता वयस्क व तीन बच्चों की मां है और दोनों के बीच सहमति से संबंध बने थे।

घटना के समर्थन में कोई चिकित्सीय साक्ष्य नहीं है और मामला झूठा है। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी महिला की सहमति गलत तथ्य या धोखे के आधार पर प्राप्त की जाती है तो वह वैध सहमति नहीं मानी जाएगी। आरोपित ने शुरुआत से ही शादी का झूठा वादा किया था तो यह गंभीर मामला है और इसका अंतिम निर्णय ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगा।

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