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आईपीएस शैलेश कुमार यादव पर नहीं लगेगा जुर्माना: हाईकोर्ट

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प्रयागराज (राजेश सिंह)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में आईपीएस अधिकारी शैलेश कुमार यादव के खिलाफ केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा लगाए गए जुर्माने और दंडात्मक कार्रवाई की संस्तुति आदेश रद्द कर दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार तथा न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने शैलेश कुमार यादव की याचिका पर दिया है। याची वर्ष 2006-2007 में गाजियाबाद में क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी और जन सूचना अधिकारी के रूप में कार्यरत था। सूचना अधिकार कानून का पालन न करने पर उसके खिलाफ आदेश जारी किया गया था।

जानबूझकर या उचित कारण न होने पर लगेगा जुर्माना

कोर्ट ने कहा सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम की धारा 20 के तहत जुर्माना केवल तभी लगाया जाना चाहिए जब अधिकारी ने जानबूझकर या बिना किसी उचित कारण के जानकारी देने में देरी की हो। बताया गया कि गाजियाबाद पासपोर्ट कार्यालय में कर्मचारियों की भारी कमी और काम के अत्यधिक दबाव के कारण देरी हुई थी, जिसे विभाग की आंतरिक जांच रिपोर्ट में भी स्वीकार किया गया था ।

कोर्ट ने पाया कि तत्कालीन सूचना आयुक्त डॉ. ओ.पी. केजरीवाल ने मुख्य पासपोर्ट अधिकारी की जांच रिपोर्ट का इंतजार किए बिना ही जल्दबाजी में 25,000/- का अधिकतम जुर्माना लगा दिया और अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश भी कर दी, जो कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण था।

सूचना आयोग के आदेशों की भाषा से पूर्वाग्रह और पक्षपात

हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि सूचना आयोग के आदेशों की भाषा से याची के प्रति पूर्वाग्रह और पक्षपात झलकता है। आयोग ने याची के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग भी किया है और बिना किसी ठोस सबूत के उन्हें "असभ्य नौकरशाह" की संज्ञा दी थी। कहा कि केवल लापरवाही या अनजाने में हुई देरी के लिए धारा 20(2) के तहत कठोर कार्रवाई की सिफारिश नहीं की जा सकती।

याचिकाकर्ता को राहत देते हुए कोर्ट ने 08 फरवरी 2007 और 19 मार्च 2007 के उन दोनों आदेशों को रद्द कर दिया जो उनके कैरियर के लिए हानिकारक साबित हो रहे थे,और उसे बड़ी राहत दी है।

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