प्रयागराज (राजेश सिंह)। संगम नगरी प्रयागराज स्थित श्री मठ बाघम्बरी गद्दी में एक विशेष आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला, जब महाभारत के प्रसिद्ध अभिनेता गजेंद्र चौहान (युधिष्ठिर) मठ पहुंचे। उन्होंने मठाधीश्वर महंत बलवीर गिरी जी महाराज से भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान मठ परिसर में मौजूद संतों और श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया।
गजेंद्र चौहान को बी.आर. चोपड़ा की विश्वप्रसिद्ध पौराणिक धारावाहिक ‘महाभारत’ में पांडु पुत्र युधिष्ठिर (धर्मराज) की भूमिका निभाने के लिए पूरे देश और विदेशों में विशेष पहचान मिली है। उनके द्वारा निभाया गया यह चरित्र आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय है और उन्हें सनातन संस्कृति के संदेशवाहक कलाकारों में गिना जाता है।
मठ में आयोजित संक्षिप्त कार्यक्रम के दौरान गजेंद्र चौहान ने महाभारत से जुड़े कई महत्वपूर्ण श्लोकों का पाठ किया और उनसे जुड़ी प्रेरक कथाओं का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार पांडवों ने अपने जीवन में कठिन परिस्थितियों का सामना किया।
वनवास के कठिन समय से लेकर हस्तिनापुर के राज्याभिषेक और महाभारत के युद्ध तक की घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने धर्म, सत्य और न्याय के महत्व को विस्तार से समझाया
उन्होंने कहा कि महाभारत केवल एक युद्ध की कथा नहीं है, बल्कि यह जीवन में सत्य, धर्म और कर्तव्य का मार्ग दिखाने वाला ग्रंथ है। उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि किस प्रकार अंततः असत्य पर सत्य की विजय होती है और यही सनातन संस्कृति का मूल संदेश भी है।
कार्यक्रम के दौरान महंत बलवीर गिरी जी महाराज ने भी गजेंद्र चौहान को आशीर्वाद देते हुए कहा कि महाभारत जैसे पौराणिक ग्रंथों के माध्यम से समाज को सदैव धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती रही है। उन्होंने कलाकारों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया, जो अपनी कला के माध्यम से संस्कृति और परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाते हैं।
इस अवसर पर मठ के संत-महंत, श्रद्धालु और कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने सनातन धर्म की परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
