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'लावान' को सुरक्षित पनाह देने पर ईरान ने भारत का जताया आभार

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नई दिल्ली। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तेजी से व्यापक होते संघर्ष के मद्देनजर हिंद महासागर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, ईरान ने अपने नौसैनिक युद्धपोत आइआरआइएस लावान को कोच्चि बंदरगाह पर सुरक्षित पनाह एवं तकनीकी सहायता देने और रसद संबंधी व्यवस्था करने के लिए भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है।

यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब ईरान का एक अन्य युद्धपोत आइआरआइएस डेना, श्रीलंका के तट के पास हाल ही में एक अमेरिकी पनडुब्बी के टारपीडो हमले में डूब गया। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथली ने विशेष रूप से कोच्चि में ईरानी युद्धपोत के डॉकिंग के लिए स्थानीय अधिकारियों और भारत सरकार के ''मानवीय दृष्टिकोण'' की सराहना की।

लावान तकनीकी और लॉजिस्टिक व्यवस्था के लिए कोच्चि में

उन्होंने कहा, '''आइआरआइएस लावान तकनीकी और लॉजिस्टिक व्यवस्था के लिए कोच्चि में है। हम चालक दल की सहायता के लिए भारत के आभारी हैं। कठिन परिस्थितियों में भारतीय अधिकारियों का उत्कृष्ट समन्वय हमारे देशों के बीच दीर्घकालिक और मैत्रीपूर्ण संबंधों को दर्शाता है।''' फथली ने विश्वास जताया कि तेहरान और नई दिल्ली के बीच ऐतिहासिक संबंध भविष्य में और मजबूत होंगे। जहां एक ओर ईरान ने भारत के साथ दोस्ती को सराहा, वहीं दूसरी ओर राजदूत फथली ने अमेरिका और इजरायल के सैन्य कदमों की कड़ी आलोचना की।

उन्होंने कहा कि यह हमला केवल ईरान पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय गरिमा पर हमला है। उन्होंने वर्तमान स्थिति को 'सत्य और असत्य' के बीच का संघर्ष बताते हुए कहा, ''एक तरफ मानवीय गरिमा और न्याय है, तो दूसरी तरफ दमन और अन्याय है। अमेरिका और इजरायली शासन का क्रूर सैन्य आक्रमण इसी अन्याय का उदाहरण है।''


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