प्रयागराज (राजेश सिंह)। शुक्रवार को उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन (एक्टू संबद्ध) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदेश स्तरीय आह्वान पर सैकड़ों आशा कार्यकर्ता जिलाधिकारी कार्यालय पर एकत्र हुए और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। इसके बाद जुलूस की शक्ल में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन सभा में तब्दील हो गया।
सभा को संबोधित करते हुए मंडल अध्यक्ष रेखा मौर्य ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं द्वारा वर्षों से विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों में दिए गए योगदान के बावजूद उन्हें न तो पारिश्रमिक मिला है और न ही प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत 2018 से किए गए कार्यों का एक भी रुपया अब तक नहीं दिया गया है। वहीं, 2019 से 2021 तक की 28 माह की प्रोत्साहन राशि भी लंबित है।
जिला उपाध्यक्ष रंजना भारती ने कहा कि कोविड-19 के दौरान घोषित 1000 मासिक प्रोत्साहन राशि भी अधिकांश कार्यकर्ताओं को नहीं मिली। इसके अलावा कुष्ठ रोग, टीबी और अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों में किए गए कार्यों का भुगतान भी अटका हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि 1090 करोड़ रुपये का आवंटन होने के बावजूद अधिकांश आशा कार्यकर्ताओं को भुगतान नहीं मिला और जहां मिला भी है, वहां अनियमितताएं देखने को मिली हैं।
यूनियन नेताओं ने यह भी कहा कि दस्तक और संचारी रोग नियंत्रण जैसे अभियानों में आशा कार्यकर्ताओं से बेहद कम दर पर काम कराया जा रहा है, जो उनके श्रम के साथ अन्याय है। साथ ही, भुगतान के नाम पर अवैध वसूली और शिकायत करने पर उत्पीड़न का भी आरोप लगाया गया।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सभी लंबित प्रोत्साहन राशि का पारदर्शी तरीके से भुगतान किया जाए, प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भुगतान का विवरण सार्वजनिक किया जाए और अवैध वसूली पर रोक लगाने के लिए सख्त निर्देश जारी किए जाएं। यूनियन ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आर-पार की लड़ाई के लिए बाध्य होंगे।
इस दौरान एक्टू जिला सचिव देवानंद, जिला अध्यक्ष सिद्धेश्वर मिश्रा सहित कई पदाधिकारी और बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता मौजूद रहे।
