प्रयागराज (राजेश सिंह)। हाईकोर्ट पानी की टंकी का पुराना पुल दस अप्रैल से बंद हो रहा है। इस पर आवागमन पूरी तरह से रोक दिया जाएगा। पुल को तोड़कर इसके स्थान पर नए पुल का निर्माण कराया जाएगा। नया पुल 2028 तक बनकर तैयार हो सकता है।
खुसरोबाग-लूकरगंज मार्ग पर स्थित हाईकोर्ट पानी की टंकी के पास बने पुराने पुल पर आगामी 10 अप्रैल से वाहनों का आवागमन स्थायी रूप से बंद किया जा रहा है। शासन की हरी झंडी मिलने के बाद अब इस जर्जर ढांचे को ढहाकर इसके स्थान पर नए आधुनिक पुल के निर्माण की कवायद शुरू कर दी गई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, नए पुल का निर्माण मई 2028 तक पूरा होने की संभावना है।
इस पुल की स्थिति लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई थी। पिछले वर्ष लखनऊ से आई टेक्निकल टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट में इस पुल को बेहद असुरक्षित बताते हुए आवागमन के लिए खतरनाक घोषित किया था। इसी रिपोर्ट के आधार पर पुल पर भारी वाहनों के प्रवेश को काफी पहले ही प्रतिबंधित कर दिया गया था। वर्तमान में इस जर्जर ढांचे का उपयोग केवल दोपहिया वाहन, साइकिल सवार और पैदल चलने वाले लोग ही कर रहे थे।
महाकुंभ-2025 के दौरान भीड़ के भारी दबाव को देखते हुए जिला प्रशासन और सेतु निगम ने इसे तोड़ने की समय सीमा को आगे बढ़ा दिया था, ताकि श्रद्धालुओं को असुविधा न हो। महाकुंभ के सकुशल संपन्न होने और नए पुल की स्वीकृति मिलने के बाद इसे ध्वस्त करने की तैयारी अंतिम चरण में है।
पुराने पुल (किमी 826/25-27, समपार संख्या 38-डी) के बंद होने से शहरवासियों को यातायात की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। 10 अप्रैल के बाद खुसरोबाग चौराहे से लीडर रोड की ओर जाने वाले सभी वाहन बगल में बने नए पुल से होकर गुजरेंगे। अचानक ट्रैफिक का सारा लोड एक ही पुल पर आने के कारण इस रूट पर जाम की स्थिति बनने की आशंका है। विशेषकर कार्यालय और स्कूल के समय में लोगों को अधिक परेशानी हो सकती है।
नए पुल के निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम लिमिटेड को सौंपी गई है। सीपीआरओ एनसीआर शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि योजना के अनुसार, रेलवे ट्रैक के ऊपर के हिस्से का निर्माण रेलवे द्वारा किया जाएगा, जबकि शेष पहुंच मार्ग और सिविल वर्क सेतु निगम पूरा करेगा। पुल के टूटने और नए निर्माण के बीच का यह समय स्थानीय निवासियों और राहगीरों के लिए चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन एक सुरक्षित और आधुनिक पुल की भविष्य की जरूरत को देखते हुए यह कदम अनिवार्य माना जा रहा है।