प्रयागराज (राजेश सिंह)। जल निगम में फर्जीवाड़ा कर करोड़ों के भुगतान घोटाले में अधीक्षण अभियंता और सहायक अभियंता दोनों पदों पर एक साथ रहे प्रवीण कुमार कुट्टी के अलावा दो अधिशासी अभियंता संदीप मौर्या व अजित मौर्या भी घिर गए हैं। लखनऊ स्थित विभाग के मुख्यालय से चल रही जांच में इन सहायक अभियंताओं के नाम सामने आए हैं। इसके अलावा अब जिम्मेदार अवर अभियंताओं की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
इस वर्ष जनवरी से लेकर मार्च के बीच जल निगम में फर्जीवाड़ा कर लगभग 20 करोड़ रुपये के भुगतान की उच्च स्तरीय जांच शुरू हो गई है। शासन के निर्देश पर जल निगम के लखनऊ मुख्यालय में तैनात मुख्य अभियंता एके सिंह को जांच अधिकारी बनाया गया है।
मुख्य अभियंता की ओर से टेक्निकल टीम प्रत्येक टंकियों की स्थलीय निरीक्षण कर रही है, जिसकी रिपोर्ट शीघ्र ही तैयार हो जाएगी। दूसरी ओर मुख्य अभियंता ने भी इस हफ्ते दो दिन रुक कर भुगतान से संबंधित सभी फाइलें जब्त कर ली हैं।
साथ ही कई पेयजल योजनाओं की जांच भी करने गए थे। पानी की टंकियों की जलापूर्ति लाइन में लीकेज दूर करने के नाम पर करोड़ों रुपये के भुगतान करने की शिकायत शासन तक पहुंची थी। जबकि लाइन में लीकेज था ही नहीं।
इसके अलावा कई पुरानी टंकियों को रेट्रोफिटिंग में ले ली गई थीं, जो बिल्कुल ठीक थीं। स्पष्ट है कि जो टंकियां मरम्मत लायक नहीं थी, उन्हें भी मरम्मत में लेकर फर्जी भुगतान का बड़ा खेल किया गया। भुगतान के दौरान एसई और एक्सईन दोनों पद ही प्रवीण कुट्टी तैनात थे।इसके बाद ही उन्होंने अपना तबादला आजमगढ़ में करा लिया है।
अधिशासी अभियंता सुरेंद्र सिंह परमार ने बताया कि मुख्यालय स्तर पर भुगतान की उच्च स्तरीय जांच कराई जा रही है। जांच अधिकारी बनाए गए मुख्य अभियंता मुख्यालय एके सिंह कार्यालय आकर भुगतान से संबंधित सभी फाइलें तथा आंकड़ें साथ ले गए।
लखनऊ स्थित जल निगम के मुख्यालय में तैनात मुख्य अभियंता ने भुगतान की जांच शुरू कर दिया है। इस बाबत उनकी ओर से भी संबंधित अधिकारियों को नोटिस भेजा गया है, जिसका जवाब आने पर आगे की कार्यवाही की जाएगी। - संजीव शाक्य, एडीएम नमामि गंगे।
