प्रयागराज (राजेश सिंह)। प्रधानी की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। तीन सप्ताह का वक्त और बचा है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी अपने अधिकार बरकरार रखने को प्रधान ऐंड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं, लेकिन इसे लेकर शासन ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। गंवई सरकार के अंतिम दौर में पक्ष-विपक्ष के बीच खींचतान और बढ़ गई है। सबकी नजरें ग्राम पंचायतों के खजाने में डंप उन 93 करोड़ रुपये पर हैं, जो गांवों के विकास लिए मिले थे।
जिले में 1540 ग्राम प्रधान व 19820 ग्राम पंचायत सदस्य हैं। 24 मई को इनका कार्यकाल पूरा हो रहा है। चुनाव के करीब आते ही ग्राम पंचायतों के खजाने खाली होने लगे थे। लंबित पड़े विकास कार्यों के पुराने भुगतान कैसे जल्द से जल्द निकाले गए, हर प्रधान का सिर्फ इसी पर जोर है। अब भी 23 ब्लाकों की ग्राम पंचायतों में 93 करोड़ रुपये बचे हुए हैं।
जैसे-जैसे कार्यकाल पूर्ण होने की तारीख करीब आ रहीं हैं, वैसे-वैसे अफसरों के पास ग्राम पंचायतों की शिकायतें भी बढ़ रहीं हैं। कुछ प्रधान भुगतान में आनाकानी कर रहे सचिवों के तबादले की गुहार लेकर पहुंच रहे हैं तो कुछ लोग प्रधानों की लंबित शिकायतों व जांचों पर तत्काल कार्रवाई कराने के लिए जुगाड़ लगा रहे हैं।
ताकि, सरकारी खजाने में शेष बची रकम का भुगतान प्रधान न कराने पाए। सीडीओ और डीडीओ से लेकर डीपीआरओ कार्यालय तक इस तरह के रोजाना करीब एक दर्जन फरियादी आ रहे हैं। अफसर भी स्थितियाें को देखते हुए उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन दे रहे हैं।
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