प्रयागराज (राजेश सिंह)। इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने अधिवक्ता कल्याण स्टांप की कमी को देखते हुए बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने अधिवक्ता कल्याण स्टांप की उपलब्धता सुनिश्चित होने तक इसकी अनिवार्यता से छूट दी है। यह जानकारी महानिबंधक द्वारा जारी अधिसूचना में दी गई है।
स्टांप वेंडर्स के अनुसार पिछले दो सप्ताह से ट्रेजरी से अधिवक्ता कल्याण स्टांप नहीं मिल रहा है। इस वजह से पिछले सप्ताह से हाई कोर्ट में स्टांप बिक्री बंद है। नियमानुसार इस स्टांप के बगैर वकालतनामा या पर्चा दाखिल नहीं हो सकता।
स्टांप की कमी के कारण अधिवक्ताओं को कैविएट, वकालतनामा दाखिल करने के लिए ब्लैक में इसे लेना पड़ रहा था। वकीलों ने महानिबंधक कार्यालय में इसकी शिकायत की थी।
एकाउंट निबंधक और एडीएम वित्त सहित प्रमुख सचिव (विधि) से बात करने और स्टांप की उपलब्धता अनिश्चित होने के कारण मुख्य न्यायमूर्ति ने यह कदम उठाया है।
बार कौंसिल के प्रयास से अधिवक्ता कल्याण कोष की स्थापना राज्य सरकार ने की है। इस कोष से अधिवक्ताओं को एक निश्चित अवधि के बाद डेढ़ लाख रुपये के फंड देने की व्यवस्था की गई है। फंड इकट्ठा करने के लिए 10 रुपये का कूपन यानी स्टांप जारी किया गया है। यह हर वर्ष राज्य सरकार द्वारा जारी किया जाता है।
इसी फंड से अधिवक्ताओं की अचानक मौत होने पर पांच लाख रुपये की सहायता उसके परिवार को दी जाती है। साथ ही नए वकीलों को पांच साल तक पांच हजार रुपये प्रतिमाह देने की घोषणा भी की गई है।
स्टांप की बिक्री रुकने से अधिवक्ता कल्याण कोष की राशि में कमी आएगी। यह पहली बार हुआ है कि राज्य सरकार अधिवक्ता कल्याण स्टांप छापने में विफल रही है और मुख्य न्यायमूर्ति को इसकी अनिवार्यता से छूट देनी पड़ी है।
अधिसूचना के अनुसार बिना स्टांप दाखिल किए जाने वाले आवेदन के साथ यह अंडरटेकिंग देनी होगी कि उपलब्धता की स्थिति में इसे लगाया जाएगा।
