मेजा, प्रयागराज (विमल पाण्डेय)। ग्राम पंचायत कनिगड़ा के ग्राम प्रधान के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह कार्रवाई ग्राम निधि से फर्जी हस्ताक्षर कर धनराशि निकालने और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की प्रारंभिक जांच में दोषी पाए जाने के बाद की गई है।
जिला मजिस्ट्रेट मनीष कुमार वर्मा के आदेश पर, ग्राम पंचायत कनिगड़ा, विकास खंड उरुवा के निवासी ललकारी, घनश्याम और अन्य द्वारा प्रस्तुत शिकायत पत्र की जांच परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, प्रयागराज को सौंपी गई थी।
जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट संख्या 58/परि०-एस०टी०/ (कनिगड़ा) आख्या/2025-26 दिनांक 02.07.2026
को `प्रस्तुत 'की। रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्राम प्रधान ने निर्वाचित होने के बाद ग्राम के निर्वाचित सदस्यों और ग्रामवासियों के फर्जी एवं कूटरचित हस्ताक्षर कर समिति का गठन दिखाया। नियमानुसार समितियों का गठन किए बिना ही ग्राम प्रधान और संबंधित सचिव द्वारा ग्राम पंचायत निधि से शासकीय धनराशि आहरित की गई।
प्रारंभिक जांच में ग्राम प्रधान और संबंधित सचिव को प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने के बाद, उन पर लगाए गए आरोपों को प्रमाणित माना गया। इसके फलस्वरूप, उत्तर प्रदेश पंचायतराज अधिनियम की धारा 95 (1) (छ) के तहत ग्राम प्रधान के ग्राम निधि खातों से धनराशि आहरण और व्यय पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। ग्राम प्रधान अपने प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकारों का प्रयोग तब तक नहीं कर सकेंगे जब तक वे अंतिम जांच में दोष मुक्त न हो जाएं।
वित्तीय अनियमितता की वसूली के लिए उपायुक्त (श्रम रोजगार), प्रयागराज को नामित किया गया है, जबकि कार्यों के मूल्यांकन में तकनीकी सहयोग प्रदान करने हेतु सहायक अभियंता (ग्रामीण अभियंत्रण विभाग), प्रखण्ड प्रयागराज को जिम्मेदारी दी गई है। ग्राम पंचायत के कार्यों का संचालन अब ग्राम पंचायत के तीन सदस्यों की समिति द्वारा किया जाएगा। यह आदेश जिला मजिस्ट्रेट मनीष कुमार वर्मा द्वारा जारी किया गया है।
