प्रयागराज (राजेश सिंह)। पुलिस महकमे में सनसनीखेज मामला सामने आया है। नियुक्ति आंतरिक जांच प्रकोष्ठ संबद्ध थाना एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग (एएचटी) में तैनात महिला सिपाही नीशू सिंह ने पूर्व साइबर थाना प्रभारी व सिपाही पर फ्रीज किए गए 33 लाख रुपये दिलाने के नाम पर 4.20 लाख रुपये कमीशन लेने का आरोप लगाया है। सिविल लाइंस पुलिस ने दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार की धारा में मुकदमा दर्ज किया है। नीशू सिंह ने तहरीर में बताया है कि उनके भाई मानवेंद्र सिंह के साथ पिछले वर्ष 60 लाख रुपये की साइबर ठगी हुई थी। 28 मई 2025 को साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। तत्कालीन प्रभारी ओम नारायण गौतम विवेचना कर रहे थे। कई बार उनके पास विवेचना के बारे में पूछने पर पता चला कि कोई प्रगति नहीं है। उच्चाधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिया तो इस वर्ष विवेचना अपराध शाखा में तैनात निरीक्षक गंगा प्रसाद को स्थानांतरित कर दी गई, लेकिन तत्कालीन विवेचक ने जांच से संबंधित दस्तावेज एक माह बाद भी नहीं दिए। नीशू के अनुसार दो अप्रैल से 28 अप्रैल 2025 तक नेशनल साइबर रिपोर्टिंग पोर्टल पर उसने खुद ऑनलाइन शिकायत दर्ज की थी, जिसके आधार पर 33 लाख रुपये फ्रीज हुआ था। इस रुपये को खाते में स्थानांतरित करने का आदेश साइबर थाने के तत्कालीन प्रभारी ओम नारायण गौतम को दिया गया, लेकिन रुपये ट्रांसफर नहीं किए गए। आरोप लगाया है कि तत्कालीन प्रभारी और सिपाही अभिषेक कुमार ने पूरे रुपये का 20 प्रतिशत कमीशन मांगा। उसने 4.20 लाख रुपये जैसे-तैसे दिए। महिला सिपाही ने रुपये वापस कराए जाने के साथ ही दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की बात अधिकारियों से कही, जिसके बाद सिविल लाइंस पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए गए। सिविल लाइंस इंस्पेक्टर रामाश्रय यादव का कहना है कि तहरीर के आधार पर दोनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
