चिकित्सकों को कुत्ते में नहीं मिले रेबीज के लक्षण
नगीना (बिजनौर)। गांव नंदपुर में चार दिन से एक कुत्ता हनुमान जी की मूर्ति की परिक्रमा कर रहा है। इसे देख गांव में ग्रामीणों ने भंडारा शुरू दिया है।
उधर, कुत्ते में जांच के बाद रेबीज के लक्षण नहीं मिले हैं। पशु चिकित्सकों का मानना है कि कुत्ते को फ्रंट ब्रेन डिसआर्डर हो सकता है। ऐसी स्थिति में ही कुत्ता बार-बार एक जैसी हरकत करता है। हालांकि इसकी पुष्टि एमआरआइ होने के बाद ही हो सकेगी। यह कुत्ता इन दिनों कौतूहल का विषय बना है। इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है।
बढ़ापुर रोड स्थित गांव नंदपुर के अंतिम छोर पर करीब 200 वर्ष से भी अधिक पुराना नंदलाल देवता महाराज का मंदिर है। मंदिर की देखरेख करने वाले तुषार सैनी बताते हैं कि रविवार की दोपहर एक कुत्ता ग्रामीणों को मंदिर के आसपास दिखाई दिया। सोमवार की तड़के जब वह मंदिर की साफ सफाई करने पहुंचे तो उन्होंने एक कुत्ते को मंदिर परिसर में लगी हनुमान जी की मूर्ति की परिक्रमा करते देखा। उन्होंने उसे वहां से भगाने का काफी प्रयास किया, लेकिन कुत्ता बराबर परिक्रमा करता रहा। लगातार चौथे दिन गुरुवार को भी उसकी परिक्रमा जारी रहै।
पता चलने पर काफी ग्रामीण पहुंच गए और उसके खाने के लिए दूध‚ रोटी रखी लेकिन उसने नहीं खाया। बुधवार देर शाम पशु चिकित्साधिकारी डा. रजनीश कुमार के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम गांव पहुंची और कुत्ते का स्वास्थ्य परीक्षण किया। डा. रजनीश कुमार ने बताया कि कुत्ता शारीरिक रूप से स्वस्थ है। रेबीज के लक्षण नहीं है।
उन्होंने बताया कि कुत्ते को फ्रंट ब्रेन डिसआर्डर हो सकता है। ऐसी स्थिति में ही कुत्ता बार-बार एक जैसी हरकत करता है। सही स्थिति कुत्ते की एमआरआइ होने के बाद ही पता चल सकेगी। तुषार सैनी ने बताया कि तीसरे दिन कुत्ते ने थोड़ा आराम करने के बाद दूध पिया और फिर परिक्रमा शुरू कर दी। आसपास के लोग मंदिर परिसर में भंडारा करने की तैयारी कर रहे हैं।
कुत्तों में फ्रंट ब्रेन डिसआर्डर (अग्र मस्तिष्क विकार) मस्तिष्क के अगले हिस्से को प्रभावित करने वाली स्थितियों को कहते हैं, जिसमें डिमेंशिया (भ्रम), दौरे या चोट जैसे विकार शामिल हैं, जिससे व्यवहार, संतुलन और चेतना में बदलाव आता है, जैसे दिशाहीन, गोल-गोल घूमना, भूख बढ़ना या घटना, व्यवहार में बदलाव। इसका कारण उम्र बढ़ना, संक्रमण या मस्तिष्क में सूजन या सिर में चोट लगना भी हो सकता है। पशु चिकित्सक एमआरआइ या सीटी स्कैन या अन्य परीक्षणों से सही कारण पता कर सकते हैं। कारणों के आधार पर ही उपचार किया जाता है। सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है।


