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एक और लव स्टोरी का दर्दनाक अंत, गर्लफ्रेंड को तवा से पीट-पीटकर मार डाला

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प्रयागराज (राजेश सिंह)। यमुनानगर के शंकरगढ़ में 27 दिसंबर को एक महिला की लाश मिली। चेहरे और गर्दन पर गहरे जख्म थे और साफ था कि उसकी हत्या की गई। 18 दिन बाद पुलिस को पता चला कि महिला मध्य प्रदेश की रहने वाली है। जिस ननदोई के साथ महिला लिव इन में थी, उसने ही बेरहमी से मर्डर कर दिया था। सबसे चौंकाने वाला था वो हथियार, जिसे उसने मर्डर के लिए चुना। उसने हत्या करने के लिए रोटी सेंकने वाले तवे का इस्तेमाल किया, ताकि महिला को शक न हो।

मर्डर के 21 दिन तक ननदोई छिपा रहा, आखिरकार पुलिस ननदोई तक पहुंच गई। इस कत्ल के पीछे की वजह 2 लाख रुपए और करीब 4 लाख रुपए के गहने थे, जो उसने महिला को इमोशनल ब्लैकमेल करके हथिया लिए थे। अब महिला उन्हें वापस मांग रही थी। ननदोई ने पुलिस से कहा-इसके बाद वारदात को अंजाम देने के लिए हत्यारे ने फुलप्रूफ प्लानिंग की। मप्र के चाकघाट में रहने वाली महिला को 15 किमी दूर यूपी की सीमा से सटे शंकरगढ़ के धवैया गांव में घूमने के बहाने से ले आया।

फिर वहां हत्या करने के बाद लाश को खेत में फेंककर भाग निकला। उसे लगा महिला मप्र की रहने वाली है, यहां उसे कोई पहचान ही नहीं सकेगा। हालांकि पुलिस ने जब क्लू से क्लू को जोड़ना शुरू किया, तो 21 दिन बाद हत्यारे तक पहुंच गई।  इस कहानी की शुरुआत 27 दिसंबर, 2025 से हुई। जब शकरगढ़ के धवैया गांव में दरोगा सिंह भदौरिया के खेत में एक महिला का खून से लथपथ शव मिला। पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी।

पुलिस महिला की चोटें देखकर समझ गई कि ये हत्या हुई है, लाश ज्यादा पुरानी नहीं थी, इसलिए पुलिस को लेकर पहचान जल्दी हो जाएगी, मगर 13 जनवरी तक महिला के बारे में कोई भी जानकारी नहीं लग सकी। न ही पुलिस से किसी ने महिला की पहचान को लेकर संपर्क किया। शंकरगढ़ पुलिस ने यूपी के प्रयागराज और एमपी के रीवा, सतना में महिला की तस्वीरों के साथ इश्तिहार चस्पा करवाए। पुलिस को इस मर्डर केस में पहला क्लू 14 जनवरी को लगा, जब मध्य प्रदेश के रीवा डभौरा में रहने वाला रामाधार शंकरगढ़ थाने पहुंचा।

थाने में उसने बताया कि धवैया गांव में जिस महिला की लाश मिली है, वह मेरी बहन ललिता (42 वर्ष) है। मैंने रीवा के चाकघाट थाने के नोटिस बोर्ड पर अपनी बहन की तस्वीर देखी। पुलिस को उसने अपनी बहन की शादी की कहानी सुनाई। कहा- ललिता की शादी 21 साल पहले चाकघाट के रीवा में रहने वाले कमलेश से हुई थी। 3 साल पहले कमलेश की हार्ट अटैक से मौत हो गई।

इसके बाद से ललिता अकेला महसूस करने लगी। तब सहारा बना उसकी ही ननद का पति धीरज। वो बारा इलाके के कुड़ी गौहानी गांव का रहने वाला है। भाई ने यह भी बताया- 26 दिसंबर, 2025 को उसकी बहन थोड़ी देर में लौटकर आने की बात कहकर घर से निकली थी, मगर फिर लौटी नहीं। उसका मोबाइल भी स्विच ऑफ हो गया था। पुलिस के लिए यह बड़ा क्लू था। पुलिस ने धीरज से बात करने का प्रयास किया, मगर उसका भी मोबाइल बंद मिला। इससे शक गहरा गया। टीम उसके घर पहुंची तो वह वहां भी नहीं था।

वहां उसकी पत्नी मिली, मगर उसने बताया कि वो अपने काम से कुछ दिनों के लिए बाहर गए हुए है। कहां गए हैं? ये भी मुझे नहीं पता। थाना प्रभारी यशपाल सिंह ने बताया- इसके बाद धीरज पर ही हमारा डाउट हो गया। उसकी डिटेल के साथ 3 टीमें एक्टिव कर दी गईं। हम जानते थे कि धीरज के मिलने के बाद ही ललिता के मर्डर की असली कहानी सामने आएगी। पुलिस की 1 टीम धीरज के घर के पास भी सादे कपड़ों में तैनात थी। 17 जनवरी को वह अपने घर पहुंचा। इसके बाद पुलिस ने घर को घेर लिया और धीरज को अरेस्ट कर लिया।

उसको थाने लाया गया। यहां उससे पूछा गया कि ललिता की हत्या क्यों कर दी? धीरज कहने लगा- मैं इस बारे में नहीं जानता हूं कि ललिता कहां है? इसके बाद ललिता के साथ लिव-इन में रहने के बारे में उससे पूछा गया? मोबाइल के  (कॉल डिटेल) दिखाए गए, जिसमें वो लगातार ललिता से बातचीत कर रहा था। 26 दिसंबर की रात में भी उसने ललिता को कॉल किया था। इसके बाद ललित का मोबाइल स्विच ऑफ हो गया था।

तब उसने पूरी सच्चाई बताना शुरू किया। कहा- ललिता के पति कमलेश की मौत होने के बाद उसको 2 लाख रुपए का एक्सीडेंट मुआवजा मिला था। ललिता अकेला महसूस करने लगी थी। जब भी मैं जाता, वह घंटों मुझसे बात करती और अपना दुख हल्का करती थी।

इस तरह धीरे-धीरे हमारा अफेयर हो गया। मैं पेशे से प्लंबरिंग का ठेका लेता था। अक्सर बड़ी-बड़ी कंस्ट्रक्शन साइटों पर काम करता था। मैं ललिता को भी अपने साथ लेकर जाने लगा। वहां हम साथ रहते, हम बिल्कुल मियां-बीवी की तरह जिंदगी बिता रहे थे। वो खुश थी। धीरे-धीरे ललिता मुझे पर भरोसा करने लगी। ललिता के अकाउंट में मुआवजे में मिले 2 लाख रुपए थे, वो हमने घूमने और खाने-पीने में खर्च कर दिए। मुझे रुपयों की जरूरत रहती थी, इसलिए मैंने ललिता का मंगलसूत्र और उसके सारे जेवर भी एक-एक करके बेच दिए।

कुछ महीने सब ठीक चला, मगर फिर वो अपने रुपए और गहने वापस मांगने लगी। एक दिन ज्यादा गुस्सा में आने पर उसने धमकी दे दी कि अगर मेरे जेवर, रुपए वापस नहीं मिलते हैं, तो मैं पुलिस के पास चली जाऊंगी। उसी दिन मैंने सोच लिया था कि अब ललिता को मार डालूंगा।

धीरज ने पुलिस को बताया- 26 दिसंबर की शाम को मैंने ललिता से कहा कि चलो कहीं घूमकर आते हैं, हम दोनों बाइक पर करीब 15ज्ञउ दूर शंकरगढ़ के धवैया गांव में आ गए। रास्ते में एक जगह पर गांव के लोग लोहे के सामान बेच रहे थे। यहीं से मैंने एक तवा खरीद लिया। हंसिया या धारदार चीज नहीं ली, ताकि ललिता को ऐसा न लगे कि मैं उसे मारना चाहता हूं। ललिता ने पूछा- ये क्यों खरीदा? मैंने कहा- घर का तवा पुराना हो गया है, इसलिए दूसरा ले लिया है।

फिर ललिता को बातों में उलझाते हुए मैं एक सुनसान जगह पर पहुंच गया। बाइक रोक दी, कहा कि लगता है कि ये खराब हो गई। फिर वो एक जगह पर बैठ गई, मुझे जैसे ही मौका मिला, पीछे से मैंने उसके सिर पर तवे से वार किया। वह जमीन पर गिर गई तो उसके चेहरे व गर्दन पर ताबड़तोड़ वार करता चला गया, जब तक कि उसकी सांस थम नहीं गई। इसके बाद शव को खींचकर कुछ दूर पर एक खेत में ले जाकर फेंक दिया। साथ ही तवे को झाड़ियों में छिपा दिया और मैं अपने घर वापस आ गया। चूंकि मैं डरा हुआ था कि पुलिस कहीं मुझे ट्रेस न कर ले, इसलिए इधर-उधर छिपकर रहने लगा। परिवार के लोगों को बता दिया था मुझे एक बड़ा ठेका मिला है, कुछ दिन वहीं रहना होगा।

शंकरगढ़ थाने के प्रभारी निरीक्षक यशपाल सिंह ने बताया-महिला की लाश मिलने के बाद 20 दिन गुजर गए थे। लगा कि ये केस खुलने की चुनौती हो गई है। मगर पुलिस के प्रयासों से हम असली कातिल तक पहुंच गए हैं। आरोपी ननदोई को अरेस्ट किया गया है, उसको जेल भेजा जा रहा है।

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