नैनी, प्रयागराज (राजेश सिंह)। संगम नगरी प्रयागराज का यमुनानगर जोन का नैनी इस समय भू-माफियाओं और भ्रष्ट सरकारी कारिंदों की कारगुजारियों का सबसे बड़ा अड्डा बन चुका है। जनता त्रस्त है और खाकी-खादी के संरक्षण में पल रहे राजस्व विभाग के 'दीमक' सरकारी जमीनों को चाट रहे हैं। तहसील के लेखपालों और भू-माफियाओं के बीच का नापाक गठजोड़ इस कदर हावी है कि यमुनापार में भूमि विवादों की एक ऐसी बारूद की ढेरी तैयार हो गई है, जो कभी भी फट सकती है। ताजा और सबसे सनसनीखेज मामला नैनी स्थित भारी उद्योग मंत्रालय की बंद पड़ी 'त्रिवेणी स्ट्रक्चरल लिमिटेड' (टीएसएल) कंपनी का है। टीएसएल की बाउंड्रीवाल से सटी बेशकीमती सरकारी जमीन को हड़पने के लिए क्षेत्रीय लेखपाल ने अपनी कलम को चंद टुकड़ों के लिए बेच दिया। लेखपाल की एक फर्जी और विवादित रिपोर्ट के बल पर भू-माफिया पूरी धड़ल्ले से इस सरकारी संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश में जुटे हैं।
नए साहब 'बेखबर', लेखपालों का 'खेला' जारी
हैरानी की बात यह है कि करछना के नवागत उप जिलाधिकारी (एसडीएम) संदीप तिवारी को शायद इस बात का भनक तक नहीं है कि उनके नाक के नीचे क्या 'खेला' चल रहा है। इन भ्रष्ट लेखपालों ने धूल फांकती पुरानी फाइलों से सरकारी जमीनों को खोज निकाला। फिर क्या था? फर्जी वसीयत तैयार की गई, कागजी हेरफेर हुआ और देखते ही देखते सरकारी जमीनें भू-माफियाओं के नाम कर दी गईं। इस काले खेल से लेखपालों ने अपनी जेबें गर्म कीं और भू-माफिया कई-कई बीघे में अवैध प्लाटिंग कर रातों-रात 'धनकुबेर' बन बैठे।
जनता का फूटा गुस्सा, 'कागजी सबूत' देने की चुनौती
टीएसएल की इस सरकारी जमीन को माफियाओं की गोद में बैठाने के बाद अब नैनी में उबाल है। स्थानीय जनता इस प्रशासनिक डकैती के खिलाफ सड़कों पर उतर आई है। विरोध प्रदर्शन उग्र रूप ले रहा है। आक्रोशित जनता ने सीधे तौर पर भ्रष्ट तंत्र को चुनौती देते हुए कहा है—"अगर इस जमीन पर कब्जा करने वाला असली मालिक है, तो लेखपाल अपने दस्तखत के साथ यह लिख कर दे कि यह जमीन आरोपी के नाम पर दर्ज है।"साफ है कि जनता अब आर-पार के मूड में है। अगर करछना प्रशासन ने इस 'लेखपाल-माफिया नेक्सस' पर तुरंत बुल्डोजर नहीं चलाया, तो नैनी की यह धरती आने वाले दिनों में किसी बड़े और हिंसक बवाल की गवाह बनेगी।
