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अदानी ग्रुप से 1500 मेगावाट बिजली खरीदी पर बड़ा निर्णय

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एफजीडी न लगाने पर यूपीईआरसी ने 5.38 रुपए प्रति यूनिट की दर को दी मंजूरी

प्रयागराज (राजेश सिंह)। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (यूपीईआरसी) ने अदानी ग्रुप की मिर्जापुर थर्मल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के 1500 मेगावाट पावर प्रोजेक्ट के पावर सप्लाई एग्रीमेंट (पीएसए) पर बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने बिडिंग रूट से मिली 5.38 प्रति यूनिट की दर को शर्तों के साथ स्वीकार कर लिया है।

आयोग ने फ्लू गैस डी-स्लफराइजेशन (एफजीडी) संयंत्र न लगाने से होने वाली बचत पर सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने साफ कहा कि हम कोई ष्डाकघरष् या सिर्फ मोहर लगाने वाला संस्थान नहीं हैं, उपभोक्ताओं का हित सर्वाेपरि है।

यूपीपीसीएल द्वारा विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 63 के तहत दाखिल याचिका पर सुनवाई के बाद आयोग ने आदेश जारी किया। आयोग ने स्पष्ट किया कि एफजीडी न लगने से वास्तविक बचत का सही आकलन जरूरी है। अदानी ग्रुप ने आयोग के दबाव के बाद एफजीडी न लगाने से औसतन 270 करोड़ रुपए की त्रैमासिक बचत बताई, लेकिन आयोग ने इसे अंतिम नहीं माना।

पावर कॉर्पाेरेशन को निर्देश दिए कि प्रोजेक्ट शुरू से लेकर पूरा होने तक हर तिमाही वास्तविक बचत का आकलन कर आयोग के सामने पेश करे, ताकि इसका पूरा लाभ प्रदेश की जनता तक पहुंचे।याचिका दाखिल करते समय यूपीपीसीएल ने एफजीडी न लगने की बचत नहीं दिखाई थी। भारत सरकार द्वारा एफजीडी अनिवार्यता खत्म करने के बाद भी दोनों पक्षों ने आपसी समझ से बचत नहीं बताई, जिस पर आयोग ने कड़ी फटकार लगाई।

इसके बाद ही 270 करोड़ रुपए का आंकड़ा सामने आया। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह से मुलाकात कर लोक महत्व प्रस्ताव दाखिल किया।

वर्मा ने कहा कि 270 करोड़ रुपए की बचत वास्तविकता से बहुत कम है। फरवरी 2025 में राज्यसभा में ऊर्जा राज्य मंत्री ने माना था कि एफजीडी की लागत 85 लाख से 1.2 करोड़ रुपए प्रति मेगावाट है। ऐसे में 1500 मेगावाट प्रोजेक्ट पर अदानी ग्रुप को करीब 2000 करोड़ (कुछ अनुमानों में 1750 करोड़) तक की बचत हो सकती है।

परिषद ने मांग की कि इस बचत का पूरा लाभ उपभोक्ताओं को मिले। कैपिटल कॉस्ट में कमी आएगी, जिससे फिक्स्ड कॉस्ट भी कम होनी चाहिए। साथ ही ष्चेंज इन लॉष् के तहत जीएसटी आदि बदलावों से भविष्य में एनर्जी चार्ज में कमी आएगी, इसकी सतत निगरानी हो।

परिषद ने यह भी सवाल उठाया कि धारा 63 के तहत टैरिफ एडॉप्शन शर्तों के साथ संवैधानिक है या नहीं। आयोग से पुनर्समीक्षा की मांग की गई, क्योंकि एफजीडी बचत से दर में बदलाव की स्थिति बन सकती है।

आयोग ने आदेश में जीएसटी बदलाव का भी आकलन करने को कहा है, जिससे एनर्जी चार्ज में कमी आएगी। कुल मिलाकर फिक्स्ड और एनर्जी चार्ज दोनों में कमी की संभावना है, जिसका फायदा उपभोक्ताओं को मिलेगा। आयोग ने उपभोक्ता हितों की रक्षा पर जोर देते हुए कहा कि रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत उचित फैसले लेना हमारी जिम्मेदारी है।

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