प्रयागराज (राजेश सिंह)। माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान के लिए आए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी यानि रथ यात्रा को रोकने का बवाल जारी रहा।
शंकराचार्य लगातार बिना अन्न जल के अनशन पर बैठे हैं।शिविर के बाहर ही दण्ड तर्पण किया। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने पंडाल में देर रात तक धरने पर बैठे रहे। उनके अनुयायी और समर्थक पूरी रात विरोध प्रदर्शन करते रहे।
अनशन पर श्रद्धालु योगी सरकार पर आरोप लगाते रहे। प्रशासन के अधिकारियों पर जमकर आरोप लगाए। कहा कि सबकुछ साजिश के तहत हुआ है। देर रात तक अधिकारी भी वार्तालाप में लगे थे लेकिन बात नहीं बनी।
प्रयागराज माघ मेले में रविवार को मौनी अमावस्या के स्नान के लिए आए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी पुलिस ने रोक दी। पुलिस ने उनसे पैदल संगम जाने को कहा। शंकराचार्य के शिष्य नहीं माने और पालकी लेकर आगे बढ़ने लगे।
इस पर शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने एक साधु को चौकी में पीटा।
इससे शंकराचार्य नाराज हो गए और शिष्यों को छुड़वाने पर अड़ गए। अफसरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, हाथ जोड़े, लेकिन वे नहीं माने। करीब 2 घंटे तक गहमा-गहमी रही।
इसके बाद पुलिस ने शंकराचार्य के कई और समर्थकों को हिरासत में ले लिया। शंकराचार्य की पालकी को खींचते हुए संगम से 1 किमी दूर ले जाया गया। इस दौरान पालकी का क्षत्रप भी टूट गया। शंकराचार्य स्नान भी नहीं कर पाए।
इस पूरे मामले से नाराज शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर में धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक पुलिस प्रशासन ससम्मान प्रोटोकॉल के साथ नहीं ले जाएगा, तब तक गंगा स्नान नहीं करूंगा।
वहीं, प्रयागराज के डीएम मनीष कुमार वर्मा ने कहा- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बिना इजाजत पालकी पर आए थे। उस समय संगम पर बहुत ज्यादा भीड़ थी। उनके समर्थकों ने बैरियर तोड़े, पुलिस के साथ धक्का-मुक्की की। हम इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं।

