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गंगा नदी नहीं, हमारी मांः कृष्णानंद जी महाराज

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प्रयागराज (जितेंद्र शुक्ल)। सद्विप्र समाज सेवा के संस्थापक पूज्य सद्गुरु स्वामी कृष्णानंद जी महाराज ने अपने ओजस्वी एवं प्रेरक आशीर्वचनों में शिष्यों को संबोधित करते हुए कहा कि गंगा केवल एक भौगोलिक नदी नहीं, बल्कि भारतीय सनातन संस्कृति की सजीव मां हैं। उन्होंने कहा कि यदि श्रद्धालु मां गंगा की आराधना, श्रद्धा, समर्पण और भक्ति भाव से सेवा व स्मरण करते हैं, तो जीवन में आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ लौकिक सुख-समृद्धि की भी प्राप्ति होती है।

पूज्य गुरुदेव ने अपने प्रवचन में विभिन्न पौराणिक, आध्यात्मिक एवं जीवनोपयोगी उदाहरणों के माध्यम से मां गंगा एवं त्रिवेणी संगम की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने महाभारत काल का उल्लेख करते हुए कहा कि भीष्म पितामह स्वयं मां गंगा के पुत्र थे और उन्होंने अपने उपदेशों में गंगा को पवित्रता, त्याग और मोक्षदायिनी शक्ति का प्रतीक बताया है। भीष्म पितामह का यह कथन कि “मां गंगा के स्मरण मात्र से पापों का क्षय होता है और अंतःकरण शुद्ध होता है” आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

सद्गुरुदेव ने बताया कि त्रिवेणी संगम में किया गया स्नान केवल शरीर की शुद्धि नहीं करता, बल्कि आत्मा को पवित्र कर सद्बुद्धि एवं जीवन कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा कि संगम तट पर श्रद्धा भाव से किया गया स्नान, दान और ध्यान मानव जीवन को सार्थक बनाता है।मौनी अमावस्या के पावन शुभ अवसर पर पूज्य सद्गुरुदेव स्वामी कृष्णानंद जी महाराज के सानिध्य में हजारों श्रद्धालु भक्तों ने विधिवत त्रिवेणी संगम में स्नान किया। इस अवसर पर दीक्षा कार्यक्रम का आयोजन भी हुआ, जिसमें अनेक भक्तों ने गुरुदेव से आध्यात्मिक दीक्षा ग्रहण कर अपने जीवन को सदमार्ग पर अग्रसर करने का संकल्प लिया। साथ ही वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-पूजन संपन्न कराया गया, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय एवं पवित्र हो उठा।

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इस अवसर पर गुरु की महत्ता को समर्पित भव्य भजन संध्या का आयोजन भी किया गया, जिसमें श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए। गुरुदेव प्रतिनिधि आचार्य कुणाल स्वामी एवं आचार्य जनेश्वर स्वामी ने गुरु महिमा पर सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किए। दोनों आचार्यों ने कहा कि गुरु ही अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाने वाले सच्चे मार्गदर्शक हैं तथा गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति की आत्मा है।कार्यक्रम में पूज्य गुरुदेव के शिष्य माननीय न्यायमूर्ति उच्च न्यायालय श्रीमती मंजू रानी चौहान एवं लोक सेवा आयोग के वरिष्ठ सदस्य डॉ. कल्पराज सिंह ने भी गुरु के महत्व पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि गुरु का सानिध्य जीवन को अनुशासन, सेवा, सत्य और करुणा के मार्ग पर अग्रसर करता है।

प्रवचन कार्यक्रम में हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं एवं शिष्यों ने अत्यंत श्रद्धा, अनुशासन और भक्ति भाव के साथ गुरुदेव के आशीर्वचनों का श्रवण किया तथा त्रिवेणी संगम स्नान के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व को आत्मसात किया। कार्यक्रम के समापन पर भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। उक्त कार्यक्रम की जानकारी उत्तर प्रदेश सद्विप्र समाज सेवा के अध्यक्ष श्री वीरभद्र प्रताप सिंह ने दी।

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