उरूवा़ में जल्द चुनाव करा ने की मांग पर जताया आक्रोश
मेजा, प्रयागराज(विमल पाण्डेय)। उरूवा विकास खंड क्षेत्र में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में हो रही देरी को लेकर प्रधान संघ ने अपना आक्रोश व्यक्त किया है। सोमवार को प्रधान संघ उरूवा़ के पदाधिकारियों ने एकजुट होकर शासन-प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और जल्द से जल्द पंचायत चुनाव कराने की मांग की। पदाधिकारियों ने इस दौरान कहा कि चुनाव में लगातार हो रही देरी से न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि गांवों के विकास कार्य भी ठप पड़ते जा रहे हैं। उनका कहना था कि यह स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों के लिए चिंताजनक है।
प्रधान संघ के अध्यक्ष राजेश द्विवेदी ने इस संबंध में कहा कि पंचायत चुनाव समय पर कराना संवैधानिक दायित्व है, लेकिन इसमें हो रही देरी लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने जोर दिया कि पंचायतें ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ होती हैं और यदि समय पर चुनाव नहीं होंगे तो गांवों में विकास की गति स्वतः ही धीमी पड़ जाएगी। उन्होंने शासन से अपील की कि जल्द चुनाव की तिथि घोषित कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुचारू किया जाए।
वहीं, प्रधान संघ के सक्रिय सदस्य ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव में देरी करना लोकतंत्र की हत्या के समान है। उन्होंने बताया कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के बिना गांवों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द चुनाव कराने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो प्रधान संघ सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होगा।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पंचायत स्तर पर विकास कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। कई योजनाएं अधर में लटकी हुई हैं और प्रशासनिक स्तर पर समन्वय की कमी देखने को मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं के कार्य बाधित हो रहे हैं, जिससे आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रधान संघ के पदाधिकारियों ने दोहराया कि पंचायत चुनाव केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि ग्रामीण लोकतंत्र का आधार है। यदि इसे समय पर नहीं कराया गया तो इसका सीधा असर गांवों की प्रगति पर पड़ेगा। उन्होंने मांग की कि संविधान द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर चुनाव कराए जाएं।
अतः आपसे निम्नलिखित मांगें की जाती हैं-
1- पंचायत चुनावों को संविधान के अनुरूप निर्धारित समय सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से संपन्न कराया जाए। 2- किसी भी परिस्थिति में पंचायतों में प्रशासक नियुक्त न किए जाएं। अन्य प्रदेशों की भांति वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार ग्राम पंचायत के पास ही रहे इसकी स्पष्ट नीति उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देशन में बनाई जाए 3- पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों एवं गरिमा की रक्षा हेतु स्पष्ट नीति बनाई जाए। ग्राम पंचायतों को स्वायत्त एवं सशक्त बनाने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएं। हमें पूर्ण विश्वास है कि आप लोकतंत्र की भावना का सम्मान करते हुए हमारी मांगों पर गंभीरता पूर्वक विचार करेंगे एवं शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेंगे। अन्यथा, संगठन को बाध्य होकर लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन प्रारंभ करना पड़ेगा।
