प्रयागराज (राजेश सिंह)। दस वर्ष से समीक्षा बैठक न होने से कोई विभागीय काम नहीं रह जाने के कारण कई प्रदेशों में राष्ट्रीय बचत विभाग बंद किया जा चुका है, लेकिन उत्तर प्रदेश में करीब आठ वर्ष से इसे बंद करने की कवायद ही चल रही है। विभाग को मृत संवर्ग घोषित किए जाने के संबंध में वित्त मंत्री की बैठक के बाद पिछले माह वित्त सचिव की अध्यक्षता में एक और बैठक हुई।
इसमें मुख्यालय, मंडलीय व जनपदीय कार्यालयों के विभिन्न संवर्गों को वित्त विभाग के अंतर्गत निदेशालय/विभाग में संविलियन किए जाने पर चर्चा हुई। तय हुआ कि एक स्थायी समिति का गठन किया जाए, जिससे कार्मिकों के संविलियन के संबंध में अंतिम निर्णय लिया जा सके। बैठक हुए एक महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद स्थिति जस की तस है।
नहीं हुई समीक्षा बैठक
राष्ट्रीय बचत विभाग का प्रमुख कार्य डाक विभाग की बचत योजनाओं के प्रति लोगों को जोड़ने के लिए एजेंट नियुक्त करना था, लेकिन तकनीक के बढ़ते प्रभाव के कारण लोग विभिन्न योजनाओं में स्वयं निवेश करने लगे। इससे विभाग धीरे-धीरे अप्रासंगिक होने लगा। स्थिति यह हो गई कि 2016 के बाद विभाग की समीक्षा बैठक ही नहीं हुई। समीक्षा नहीं होने से कोई नए कार्य विभागीय अधिकारियों को नहीं मिले।
ऐसे में गठित प्रशासनिक सुधार समिति ने 2018 में राष्ट्रीय बचत विभाग की उपादेयता नहीं रह जाने पर इसे अनुपयोगी बताते हुए बंद करने की सिफारिश की। इसके बाद से कार्मिकों के संविलियन की प्रक्रिया ही चल रही है। इसके विपरीत उत्तराखंड, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कर्नाटक सहित कुछ अन्य राज्यों में कार्मिकों का संविलियन संबंधित विभाग में करके इसे बंद कर दिया गया।
इधर, उत्तर प्रदेश में इस दिशा में यह निर्धारित हो चुका है कि अधिकारियों व कर्मचारियों को कहां और किस कैडर में भेजा जाना है, इसके बावजूद अपेक्षित परिणाम अब नहीं निकल सका। विभाग को मृत संवर्ग घोषित किए जाने के संबंध में अपर मुख्य सचिव ने 18 सितंबर 2025 को, वित्त मंत्री ने चार नवंबर 2025 को बैठक की थी।
इसके बाद आठ मई 2026 को सचिव संदीप कौर की अध्यक्षता में इसी संबंध में हुई बैठक के बाद से अब तक स्थिति यथावत है। इससे विभाग में कार्यरत अधिकारी व कर्मचारी बिना काम के कार्यरत हैं।
