प्रयागराज (राजेश सिंह)। किसी ने सही कहा है कि जब खुद का घर शीशे का हो तो दूसरों के मकान में पत्थर नहीं मारते। धनूपुर ब्लाक की दो ग्राम पंचायतों किरांव व शंकरपुर के प्रधान शायद इस कहावत को भूल गए। एक सप्ताह पहले दोनों प्रधानों के प्रतिनिधियों ने सचिव पर कूड़ेदान की खरीद में करीब छह लाख के गबन का आरोप लगाया।
बीडीओ ने जांच तो 16.28 लाख का घोटाला सामने आया। खास बात यह है कि इस घोटाले में अब वह प्रधान खुद भी फंस रहे हैं, जिन्होंने सचिव की शिकायत की थी। फिलहाल, प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है।
किरांव की प्रधान निर्मला देवी और शंकरपुर की प्रधान सोनी देवी हैं। दोनों ही ग्राम पंचायतों में एक ही सचिव संगमलाल पटेल की तैनाती हैं। दोनों प्रधानों के प्रतिनिधि 11 जून को डीडीओ जीपी कुशवाहा से मिले थे। डीडीओ के निर्देश पर धनूपुर के बीडीओ उमेश कुमार सिंह ने प्रकरण की जांच की। विकास विभाग के एक उच्चपदस्थ अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सिर्फ कूड़ेदान की खरीद की हेराफेरी पकड़ी गई थी।
इस खुलासे के बाद जब सचिव को तलब किया तो 16.28 लाख का घोटाला उजागर हुआ। अधिकारी के मुताबिक यह पूरा भुगतान मई और जून में किया गया था। हैंडपंपों की मरम्मत, इंटरलाकिंग, ह्यूमपाइप व कूड़ेदान की खरीद के नाम पर यह धनराशि निकाली गई है। शंकरपुर में करीब 4.53 लाख तो किरांव में 11.75 लाख रुपये का भुगतान हुआ है।
विभागीय अधिकारी ने बताया कि पहले दोनों प्रधानों ने बिना काम कराए भुगतान कराया था। जब सचिव को इसका पता चला तो उसने भी बगैर काम के धनराशि निकाल ली। किरांव प्रधान प्रतिनिधि राजाराम यादव ने बिना काम के भुगतान वाले आरोपों को निराधार बताया। वहीं शंकरपुर के प्रधान प्रतिनिधि कुछ बोलने को तैयार ही नहीं हुए।
दो एडीओ और एक जेई लेंगे पाई-पाई का हिसाब
बीडीओ का कहना है कि दोनों गांवों में लगभग 16.28 लाख की अनियमितता सामने आई है। अब इसकी तकनीकी व विस्तृत जांच के लिए एडीओ पंचायत, एडीओ एजी और आरईडी के जेई को मिलाकर एक कमेटी गठित की गई है। यह टीम पता लगाएगी कि किस-किस मद में कितना भुगतान हुआ।
