प्रयागराज (राजेश सिंह)। सिविल लाइंस स्थित श्रीहनुमत निकेतन मंदिर में चढ़ावा धनराशि में अनियमितता के आरोपों को लेकर डीएम मनीष कुमार वर्मा ने सीडीओ हर्षिका सिंह को जांच सौंप दिया है। यह जांच दर्शनार्थी पक्ष के अधिवक्ता की शिकायत पर कराई जा रही है।
अधिवक्ता ने सवाल उठाए हैं कि पुराने 18 दानपात्रों की चाबी का पता नहीं है। आरोप तो यहां तक लगा दिए कि पुराने दानपात्रों से चढ़ावा की धनराशि निकाली जा रही है। दावा किया कि गिनती कराने पर इसकी पोल खुल जाएगी। वहीं रिसीवर व एडीएम आपूर्ति विजय कुमार शर्मा ने कहा कि नए दानपात्रों की चाबी उनके पास है। पुराने दानपात्रों की चाबी किसके पास है यह उन्हें सटीक जानकारी नहीं है।
कुछ वर्ष पहले चढ़ावा धनराशि, दुकानों व अन्य भवनों के किराया की राशि तथा आय को लेकर विवाद शुरू होने पर दर्शनार्थी पक्ष के लोग न्यायालय की शरण में गए थे। दर्शनार्थी पक्ष के अधिवक्ता एसके दुबे ने बताया कि न्यायालय ने जिलाधिकारी को मंदिर का रिसीवर नियुक्त किया था, जिसके बाद एडीएम आपूर्ति विजय कुमार शर्मा को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई।
रिसीवर बैठाने के बाद मंदिर प्रबंधन तथा ट्रस्ट के सदस्यों के अधिकार पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। अधिवक्ता एसके दुबे व शिवगोपाल का आरोप है कि इसके बाद भी प्रबंधन से जुड़े लोगों के ही कब्जे में मंदिर है। आरोप लगाया कि रिसीवर नियुक्त होने के बाद भी मंदिर में अनेक अनैतिक कार्य हो रहे हैं।
अधिवक्ता ने नोटरी हलफनामा देते हुए आरोप लगाया कि पुराने दानपात्रों की चाबी तक रिसीवर नहीं ले सके हैं जिससे उसमें रखी धनराशि में गड़बड़ी की जा रही है। कहा कि नए दानपात्रों के धनराशि की गिनती ट्रस्टियों व दर्शनार्थी पक्ष के सामने नहीं कराई जा रही है, जिससे गड़बड़ी की आशंका है।
आरोप लगाया कि वर्ष 2019 के कुंभ के दौरान काफी चढ़ावा चढ़ा था। पूरे वर्ष में छह बार गिनती कराई थी जिसमें 70 से 80 लाख रुपये चढ़ावा के रूप में मिले थे।
उस हिसाब से वर्ष 2020 से अब तक कुल 18 बड़े दानपात्रों में लगभग पांच करोड़ रुपये चढ़ावा की राशि होनी चाहिए, क्योंकि वर्ष 2025 के महाकुंभ में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में आए थे। डीएम के पत्र के बाद सीडीओ हर्षिका सिंह ने जांच को लेकर तीन अधिकारियों को लगाया है जो जल्द ही जांच शुरू करेंगे।
