मिर्जापुर (राजेश सिंह)। अहरौरा में हुए 1400 करोड़ के स्मारक घोटाले का जिन्न चार वर्ष बाद फिर बाहर आ गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) लखनऊ की टीम ने गुरुवार को अहरौरा पहुंचकर जनपद के 24 पत्थर आपूर्तिकर्ताओं को नोटिस जारी करते हुए 15 दिन में कई बिंदुओं पर जवाब मांगा है। नोटिस मिलने के बाद पत्थर आपूर्तिकर्ताओं की धड़कन बढ़ गई है।
वर्ष 2007 से 2012 के बीच महापुरुषों की याद में लखनऊ व नोएडा में तत्कालीन बसपा सरकार द्वारा बनवाए गए स्मारकों में मीरजापुर से पत्थरों की आपूर्ति हुई थी। लगभग 4200 करोड़ के पत्थरों की आपूर्ति में सौ हाथी बनवाने के लिए पत्थर गए थे। इस दौरान कांशीराम स्मारक हाथी पार्क, बाबा साहेब डाक्टर भीमराव आंबेडकर स्मारक पार्क गोमती नगर समेत लखनऊ में ही एक दर्जन स्मारक तथा नोएडा सेक्टर-95 में हाथी पार्क जहां लगभग 50 हजार से अधिक घन मीटर पत्थरों की आपूर्ति मीरजापुर से की गई थी।
इसे लेकर उपजे विवादों के बाद न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा को जांच दी गई थी। उन्होंने ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध शाखा) उत्तर प्रदेश के सहयोग से जांच के बाद अपनी रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी थी। इसमें 1400 करोड़ रुपये का घोटाला मीरजापुर में सामने आया था।
चार साल पूर्व जांच हुई थी। इसके बाद अब पुन: इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय की ओर से जांच को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इसमें सभी 24 पत्थर आपूर्तिकर्ताओं को नोटिस जारी करते हुए 15 दिन में उनसे वर्ष 2007 से 2012 के बैंक खातों का डिटेल व कहां-कहां और कब-कब कितने घन मीटर पत्थरों की आपूर्ति की है। इसका विवरण मांगा गया है। इसके साथ ही उनके नाम पर किसी और ने तो नहीं पत्थरों की आपूर्ति की है। इसका भी विवरण मांगा गया है।
ईडी सीधे पत्थर आपूर्तिकर्ताओं को नोटिस देती है। खनन विभाग को इसकी जानकारी नहीं देती है। जब किसी मामले में जानकारी लेनी होती है तो खनन विभाग को जानकारी दी जाती है। इसके बाद जो जानकारी मांगी जाती है दी जाती है। -जितेंद्र सिंह, खनन अधिकारी
