मेजा, प्रयागराज (राजेश शुक्ल)। प्रयागराज जिले के मेजा कोतवाली क्षेत्र में अवैध जुए का कारोबार अब एक संगठित कुटीर उद्योग का रूप ले चुका है। दशकों से बेखौफ संचालित हो रहे इस अंतर्जनपदीय जुए के फड़ पर प्रतिदिन लाखों रुपये का दांव लगाया जा रहा है। इस अवैध तंत्र के लगातार शक्रिय रहने से स्थानीय कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मेजा में संचालित यह फड़ केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आसपास के कई जिलों से भी जुआरी हिस्सा लेने पहुँचते हैं। पर्दे के पीछे से काम करने वाले गुमनाम संचालकों ने इस कारोबार को एक पूर्ण विकसित उद्योग की तर्ज पर ढाल दिया है। इस नेटवर्क को सुचारू रूप से चलाने के लिए निजी सुरक्षाकर्मियों तक को तैनात किया गया है, जिन्हें रोजाना लगभग पांच सौ रुपये का भुगतान किया जाता है।
इस अवैध धंधे के निर्बाध संचालन के पीछे एक बड़े तंत्र का संरक्षण होने का दावा किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो, फड़ को बिना किसी रोक-टोक के चलाने के लिए प्रतिदिन इलाकाई स्तर पर पचास से साठ हजार रुपये तक की रकम (पानी और गिलास पहुंचाने वाले को 300 रुपए, पुलिस के आने की सूचना देने के लिए लगाए गये गुप्तचरों को 500 रुपए, मीडिया को जानकारी न हो इसके लिए 300 से 2000 रुपए बांटे जाने की चर्चाएं ख़ास है। इसके अलावा, समाज के कुछ प्रभावशाली और मानिंद लोगों को भी इस नेटवर्क द्वारा साधकर रखा गया है, जिससे इस तंत्र पर आंच न आए।
दशकों से चले आ रहे इस जुए के फड़ के कारण क्षेत्र का सामाजिक माहौल प्रभावित हो रहा है। कई परिवार इस सामाजिक बुराई के कारण आर्थिक तंगी की चपेट में आ चुके हैं। यद्यपि पुलिस प्रशासन की ओर से समय-समय पर अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन इस अंतर्जनपदीय नेटवर्क के मुख्य संचालकों पर शिकंजा न कसा जाना जनचर्चा का विषय बना हुआ है।
मेजा क्षेत्र में समानांतर व्यवस्था की तरह फल-फूल रहा यह अवैध कारोबार न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि युवा पीढ़ी को भी गलत दिशा में धकेल रहा है। क्षेत्र में शांति और कानून का राज स्थापित करने के लिए उच्च प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इस संगठित नेटवर्क की निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता है।
अगले अंक में - मेजा के ग्रेट गैंबलर गैंग की कारस्तानी से बर्बाद हो रही जेन-जी
