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प्रयागराज में किरायेदार महिला के साथ बड़ी ठगी: फर्जी एफआईआर और गिरफ्तारी का डर दिखाकर मकान खाली कराया

SV News

ताला तोड़कर लाखों का सामान बेचा, पीड़िता ने डीसीपी यमुनानगर से लगाई न्याय की गुहार

प्रयागराज (राजेश सिंह)। यमुनानगर जोन के गौहनिया क्षेत्र से मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। जहां एक किरायेदार महिला को फर्जी मुकदमा और गिरफ्तारी का डर दिखाकर जल्दबाजी में मकान खाली कराया गया और बाद में कमरे में रखा लाखों रुपये का घरेलू सामान ताला तोड़कर बेच दिया गया। 

पीड़िता श्रीमती डॉली पत्नी बिसम्भर सिंह निवासी भैयापुर पहाड़ू ने इस पूरे षड्यंत्र के खिलाफ पुलिस उपायुक्त DCP यमुनानगर जोन प्रयागराज को शिकायती पत्र देकर नामजद आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

पीड़िता के अनुसार उनके पति बिसम्भर सिंह जिला सहकारी बैंक शाखा जसरा में प्रबंधक के पद पर तैनात थे जो वर्तमान में निलंबित हैं। बैंक में ऋण वसूली के मामले की जांच के चलते परिवार आर्थिक और मानसिक परेशानी से गुजर रहा था। इसी दौरान जिला सहकारी बैंक के सचिव रामजी पाल (जारी समिति) ने उन्हें गौहनिया में किराए पर मकान दिलवाया था। मकान मालिक निलेश सिंह से परिचय भी सचिव ने ही कराया था। पीड़िता का आरोप है कि सचिव रामजी पाल स्वयं मकान मालिक के दूसरे मकान में दिसंबर 2024 से किराए पर रह रहे हैं।

आरोप है कि मकान में रहने के दौरान मकान मालकिन *गुंजन सिंह पत्नी निलेश सिंह बार-बार कहती थी कि जून माह का किराया और दूध का पैसा हमें मत दो, हम सचिव रामजी पाल से ले लेंगी। पीड़िता ने इसके बावजूद 19 जून तक का किराया और 31 मई तक का दूध का भुगतान कर दिया था।

पीड़िता का आरोप है कि एक दिन सुबह जब उनके पति और बेटा घर से बाहर गए थे, तभी गुंजन सिंह ने आकर कहा कि पुलिस आई थी, तुम्हारे पति पर FIR दर्ज हो गई है और गिरफ्तारी वारंट जारी हो गया है। अगर तुरंत मकान खाली नहीं किया तो पुलिस यहीं से गिरफ्तार कर लेगी।

इस झूठी और भ्रामक सूचना से डर कर पीड़िता ने 24 जून 2026 को सुबह करीब 11 बजे आनन-फानन में कुछ जरूरी सामान लेकर मकान छोड़ दिया और बाकी सारा कीमती सामान कमरे में ही बंद छोड़ दिया। पीड़िता का कहना है कि वाहन और ड्राइवर की व्यवस्था भी गुंजन सिंह ने खुद की और साथ में सख्त हिदायत दी कि ड्राइवर से कोई बात नहीं करनी है। उस समय गुंजन सिंह की मां भी मौके पर मौजूद थी।
मकान छोड़ने के बाद पीड़िता ने कई बार मकान मालिक निलेश सिंह को फोन किया लेकिन फोन नहीं उठा। करीब एक सप्ताह बाद जब बात हुई तो निलेश सिंह ने बताया कि कमरे का ताला खोलकर सारा सामान बेच दिया गया है।

बेचे गए सामान में गैस चूल्हा, LPG सिलेंडर, इंडक्शन, फ्रिज, कूलर, इन्वर्टर-बैटरी, स्टील के बर्तन, प्रेशर कुकर, बेड, गद्दे, तकिया, चादर, कपड़े, जूते-चप्पल, रसोई का पूरा राशन और जरूरी दस्तावेज सहित घर गृहस्थी का पूरा सामान शामिल है। जिसकी विस्तृत सूची प्रार्थना पत्र के साथ संलग्न है।

पीड़िता ने दावा किया है कि उनके पास निलेश सिंह के साथ हुई बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग मौजूद है, जिसमें निलेश सिंह खुद स्वीकार कर रहा है कि पति के खिलाफ FIR की जानकारी उसे सचिव रामजी पाल से मिली थी। इससे साफ होता है कि सचिव रामजी पाल, निलेश सिंह और गुंजन सिंह ने आपस में सांठगांठ कर डरा-धमकाकर मकान खाली कराया और फिर अमानत में खयानत की।

पीड़िता ने पूरे मामले को धोखाधड़ी, चोरी, अमानत में खयानत और डराने-धमकाने का गंभीर अपराध बताते हुए DCP से मांग की है कि नामजद अभियुक्तों रामजी पाल, निलेश सिंह, गुंजन सिंह और उनकी मां के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज कर सामान बरामद कराया जाए और कॉल रिकॉर्डिंग को साक्ष्य के रूप में शामिल कर निष्पक्ष जांच की जाए।

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