मांडा (शशि भूषण द्विवेदी)। जिनके कहे शब्द और विचार कभी रद्द न हों, उनको नारद कहा जाता है। धर्म के मामले में पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं का अधिक ध्यान ,रुचि और समर्पण होता है , इसीलिए महिलाओं को धर्म की धुरी मानकर उनका सम्मान किया जाता है।
उक्त विचार केबी महाविद्यालय महाविद्यालय मिर्जापुर के प्राचार्य डाक्टर रविन्द्र कुमार द्विवेदी के पैंड़ापुर स्थित पैतृक आवास पर चल रहे भागवत कथा के तीसरे दिन नारद व्यास संवाद, शुकदेव आगमन , परीक्षित जन्म और देवहुति संवाद के दौरान अपनी संगीतमयी भागवत कथा वाचक पंडित राम कुमार पांडेय ने व्यक्त किया। कथा क्रम को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि जो इंसान अपने आपको भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित कर देता है , भगवान हर तरह से उसकी रक्षा और सुरक्षा करते हैं। कहा कि पूजा पाठ और दर्शन पूजन के दौरान महिलाएं वसुधैव कुटुंबकम् की भावना से ओत-प्रोत होकर मायके और ससुराल दोनों पक्षों के हित के लिए भगत्प्रार्थना करती हैं, लेकिन पुरुष वर्ग ऐसा नहीं कर पाता। यद्यपि पूतना भगवान श्रीकृष्ण को जान से मारने की नीयत से दुग्धपान कराने आयी थी , लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने उसके दुग्धपान कराने के भाव को भी मातृवत् मानते हुए उसका उद्धार करके उसे अपने लोक में स्थान दिये। कन्हैया अब तो आ जाओ , तुम्हारी याद आती है , भजन पर मौजूद सभी भक्त भाव विभोर रहे । कथा में डाक्टर प्रेम शंकर पांडेय, आचार्य ओंकारेश्वर प्रसाद द्विवेदी, प्रशासनिक अधिकारी रविकांत द्विवेदी, अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद पाठक, इंद्रमणि द्विवेदी, पंडित ज्ञानेश्वर शास्त्री आदि तमाम गणमान्य लोग मौजूद रहे। कथा के समापन मुख्य यजमान डाक्टर स्नेहलता द्विवेदी प्रधानाचार्या उमा माधुरी इंटर कॉलेज पैंड़ापुर ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया। भागवत भगवान् के आरती में विकास द्विवेदी, साक्षी द्विवेदी व स्वाती द्विवेदी सहित तमाम लोगों ने भाग लिया।
