प्रयागराज (राजेश सिंह)। पितृपक्ष के अंतिम दिन सर्व पितृ अमावस्या पर शनिवार को संगम तट सहित गंगा-यमुना के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई और तीर्थ पुरोहितों के मार्गदर्शन में विधि-विधान से स्नान, तर्पण और पिंडदान कर अपने पूर्वजों का स्मरण किया।
आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की इस अमावस्या को सर्व पितृ अमावस्या, पितृ विसर्जनी अमावस्या और महालया अमावस्या भी कहा जाता है। यह पितृपक्ष का अंतिम दिन होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन उन सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के निमित्त श्राद्ध किया जा सकता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका श्राद्ध निर्धारित तिथि पर नहीं हो सका।
पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर की रात 9:35 बजे से शुरू होकर 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे तक रहेगी। शनिवार को श्राद्ध के लिए कुतुप मुहूर्त सुबह 11:45 से दोपहर 12:31 बजे तक, रौहिण मुहूर्त दोपहर 12:31 से 1:18 बजे तक और अपराह्न काल 1:18 से 3:37 बजे तक रहा। विशेष मुहूर्त में श्रद्धालुओं ने अपने पितरों का आह्वान कर तर्पण किया।
पिंडदान में परंपरा के अनुसार चावल या जौ के आटे, दूध, खोवा, काले तिल, घी, शहद और गुड़ का प्रयोग किया गया। कुछ परिवारों में पके चावल से भी पिंड बनाए गए। पूजन में कुश, गंगाजल, सफेद फूल और अक्षत का उपयोग किया गया। तर्पण, पिंडदान के बाद ब्राह्मण भोजन और सामर्थ्य अनुसार दान की परंपरा निभाई गई।

