प्रयागराज (राजेश सिंह)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झांसी में एक संपत्ति पर तोड़फोड़ करने के मामले में याची और प्रशासनिक अधिकारियों के दावे-प्रतिदावों की हकीकत की जांच मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को सौंपी है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झांसी में एक संपत्ति पर तोड़फोड़ करने के मामले में याची और प्रशासनिक अधिकारियों के दावे-प्रतिदावों की हकीकत की जांच मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को सौंपी है। कोर्ट ने सीजेएम को मौका मुआयना कर 10 दिन में यह रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है कि प्रशासन ने सार्वजनिक रास्ता खुलवाया है या किसी की निजी संपत्ति पर बुलडोजर चलाया है। यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने झांसी निवासी राकेश कुमार नायक व एक अन्य की याचिका पर दिया है।
मामला मऊरानीपुर का है। याची ने आरोप लगाया कि तहसील प्रशासन ने बिना किसी आदेश के घर की दीवार और फेसिंग को ढहा दिया, जबकि प्रश्नगत संपत्ति का मामला सिविल कोर्ट में लंबित है। वहीं, कोर्ट के आदेश पर पेश हुईं मऊरानीपुर की उपजिलाधिकारी श्वेता साहू, नायब तहसीलदार रंजीत कुमार और थाना प्रभारी मुकेश कुमार सोलंकी ने हलफनामा दाखिल किया। दावा किया कि उन्होंने याची की संपत्ति पर कोई कार्रवाई नहीं की है। याची के पड़ोसी की शिकायत पर सार्वजनिक मार्ग पर याची के अतिक्रमण को हटाया गया है।
याची ने लोहे के एंगल और नेट लगाकर सार्वजनिक सीसी रोड को ब्लॉक कर दिया था। इससे इनके पड़ोसी का रास्ता बंद हो गया था। कोर्ट ने पाया कि याची और प्रशासनिक अधिकारियों के दावों में विरोधाभास है। लिहाजा, कोर्ट ने सीजेएम को मौका मुआयना करने का आदेश दिया है। पूछा है कि क्या वाकई वहां कोई सार्वजनिक सड़क है? और क्या पड़ोसी का रास्ता पूरी तरह बंद था?