प्रयागराज (राजेश सिंह)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पति के चरित्र पर कीचड़ उछालना क्रूरता है। बिना सबूत पति पर अवैध संबंध का आरोप लगाना उसकी सामाजिक और मानसिक हत्या करने जैसा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पति के चरित्र पर कीचड़ उछालना क्रूरता है। बिना सबूत पति पर अवैध संबंध का आरोप लगाना उसकी सामाजिक और मानसिक हत्या करने जैसा है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति नीरज तिवारी और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने पति की ओर से दाखिल तलाक की अर्जी मंजूर कर ली। कहा कि अगर पति ने वर्षों तक कोई गिला-शिकवा नहीं किया तो इसका यह मतलब कतई नहीं है कि वह प्रताड़ित नहीं है।
भारतीय समाज में पुरुष अक्सर लोकलाज और बच्चों के भविष्य के लिए नरक जैसी स्थिति झेलते हैं। मामला वाराणसी का है। गुरुग्राम में एक निजी कंपनी में तैनात उप प्रबंधक की शादी वाराणसी में तैनात अध्यापिका से 25 नवंबर 2003 में हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी। उनके दो बेटे हैं। पति-पत्नी के बीच शंका की दीवार खड़ी होने से 2011 से दोनों अलग रहने लगे। बच्चों का पालन-पोषण दादा-दादी कर रहे हैं।