नई दिल्ली। ट्रेड डील पर भारत-अमेरिका के संयुक्त बयान और उसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से जारी अध्यादेश के बाद एक बात पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है कि रूस से भारत तेल खरीदना जारी रखेगा या नहीं।
दोबारा टैरिफ लगा सकता है अमेरिका
राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर से जारी अध्यादेश में रूस से पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने को लेकर भारत पर लगाये गये 25 फीसद टैरिफ को हटाने का प्रावधान है। इसके साथ ही इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि अगर भारत फिर से रूस से सीधे या परोक्ष तौर पर पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद करता है तो राष्ट्रपति के पास दोबारा टैरिफ लगाने का अधिकार होगा।
अमेरिका का अध्यादेश
राष्ट्रपति ट्रंप के अध्यादेश में कहा गया है कि, व्यापार सचिव, विदेश सचिव, खजाना सचिव व व्यापार सचिव द्वारा उचित समझे गए किसी अन्य वरिष्ठ अधिकारी के साथ विमर्श से यह निगरानी करेंगे कि क्या भारत ने रूस के तेल का प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से आयात फिर से शुरू कर दिया है, जैसा कि कार्यकारी आदेश 14329 की धारा 7 में परिभाषित है।
अध्यादेश में आगे कहा गया, यदि व्यापार सचिव को यह पता चलता है कि भारत ने रूसी संघ के तेल का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आयात फिर से शुरू कर दिया है, तो विदेश सचिव, खजाना सचिव, व्यापार सचिव, गृह सुरक्षा सचिव, संयुक्त राज्य अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि, राष्ट्रपति के राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के सहायक, राष्ट्रपति के आर्थिक नीति सहायक व राष्ट्रपति के वरिष्ठ व्यापार एवं विनिर्माण परिषद के साथ परामर्श करके, राष्ट्रपति को सिफारिश करेंगे कि भारत के संबंध में अतिरिक्त कार्रवाई की जाए या नहीं, कार्रवाई करनी है तो किस हद तक। इसमें यह शामिल है कि क्या भारत से आयातित वस्तुओं पर 25 प्रतिशत की अतिरिक्त शुल्क दर को फिर से लागू किया जाना चाहिए।
विदेश मंत्रालय ने तेल खरीद पर दिया था बयान
इस अध्यादेश के आने के बाद वाणिज्य मंत्री गोयल से पूछा गया कि क्या भारत इस बात के लिए सहमत हो गया है कि रूसी तेल आयात नहीं करेगा, तो उनका संक्षिप्त जवाब था कि, विदेश मंत्रालय इसकी जानकारी आपको दे पाएंगे। विदेश मंत्रालय ने दो दिन पुराने अपने बयान को जारी किया जिसमें कहा गया है कि 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा जरूरत को पूरा करना प्राथमिकता है।
दो दिन पहले प्रेस वार्ता में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था, भारत की ऊर्जा स्त्रोतों के संबंध में, सरकार ने कई अवसरों पर सार्वजनिक रूप से कहा है कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। रणधीर जायसवाल ने आगे कहा था, उद्देश्यपूर्ण बाजार स्थितियों और विकसित हो रही अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता के अनुरूप अपनी ऊर्जा स्त्रोतों में विविधता लाना हमारी इस रणनीति का मूल है।
एमईए की तरफ से आगे बताया गया, भारत के सभी कार्य इसी दृष्टिकोण से किए जाते हैं और भविष्य में भी किए जाएंगे। यह भी उल्लेखनीय है कि एमईए के उक्त बयान से पहले वाणिज्य मंत्री ने संसद में अपने बयान में भी यहीं बाते कही थी।
